जंग में अब्बास आया है, समज़ता क्यूं नहीं?
हश्र का हंगाम लाया है, समज़ता क्यूं नहीं?
है शुजाअत उसकी जिसने जंग के मैदान में,
बाबे खैबर को उठाया है, समज़ता क्यूं नहीं?
रेह के हैदर ज़ुले में जो अजदहा को चीर दे,
लड़ना खुद उसने सिखाया है, समज़ता क्यूं नहीं?
मत लड़ो अय नौजवानों पीर ये कहने लगे,
रन में हैदर बनके आया है, समज़ता क्यूं नहीं?
भाग जा बेटा अदू से ये कज़ा केहने लगी,
तुजपे मेरा आज साया है, समज़ता क्यूं नहीं?
हुरमला औकात बतला दी तेरी बेशीर ने,
तेरे आगे मुस्कुराया है,समज़ता क्यूं नहीं?
जान प्यारी है तुझे तो भाग जा इस दस्त से,
गैज़ में फिर शेर आया है, समज़ता क्यूं नहीं?
फ़िक्र इतनी थी कहां अशआर में तेरे "कलीम",
तुझको मौला ने लिखाया है, समज़ता क्यूं नहीं?
ટિપ્પણીઓ નથી:
ટિપ્પણી પોસ્ટ કરો