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શુક્રવાર, 24 એપ્રિલ, 2020

કતઆ ઉર્દુ

(1)

नौ लाखका लश्कर है अकेला हुसैन है
नासिर है न यावर है अकेला हुसैन है
हरशुं तीरो तबर है अकेला हुसैन है
और शिम्रका खंज़र है अकेला हुसैन है

ज़हरा करीबे सरवर हाय अश्कबार है
मरकदमें मुस्तफा भी बहोत सोगवार है.

(2)

कोई भी और क्या चर्चा अलीकी बात करते है
भला किस बातसे डरना अलीकी बात करते है
खुदाका तज़किरा मैने किया जब बरसरे महेफिल
नुसेरीने कहा अच्छा अलीकी बात करते है

(3)

 मकतलमें मुस्कुरा दिया मैं इसलिए "कलीम"
दो शेर थे और सामने बंदर हजार थे

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