body { user-select: none !important; -moz-user-select: -moz-none !important; -webkit-user-select: none !important; -ms-user-select: none !important; } .post-body blockquote, .post-body pre, .post-body code { user-select: text !important; -webkit-user-select: text !important; -ms-user-select: text !important; -moz-user-select: text !important; }

રવિવાર, 26 એપ્રિલ, 2020

अय ज़हीर

بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ


ज़ोलिया फैलाई जिसने तेरे दर पर अय ज़हीर
रोता आया, चल दिया वो शख्स हंसकर अय ज़हीर

जाफरी किरदार, तुं है वारिसे मुश्किलकुशा
मुश्किलोका तोड़ दे तुं मेरा खैबर अय ज़हीर

बागे इस्मतकी कली तुं, तुं अलीका लाल है
क्यू न दुनिया सर ज़ुकाए तेरे दर पर अय ज़हीर

मिदहते हैदर सुनाकर तुंने की है रहबरी
तेरे जैसा और न होगा सुखनवर अय ज़हीर

ज़ाकिरे आले रसूलको कामरानी कर अता
हर सुखनवरको तुं दे लफ़्ज़ोके गौहर अय ज़हीर

गोदीया खाली है जिनकी उनको तुं औलाद दे,
दर्द सबके दूर कर, खुशियां अता कर अय ज़हीर

'जुंबिशे लब' जैसी मेरे लबको भी जुंबिश मिले
                                       इल्तेजा है ये "कलीम"की तेरे दर पर अय ज़हीर


ખાદિમહુસૈન કલીમમોમિન- વલેટવા

ટિપ્પણીઓ નથી:

ટિપ્પણી પોસ્ટ કરો