बताऊ कैसे मैं रुत्बा जनाबे ज़यनबका
मकां बलंदीसे ऊंचा जनाबे ज़यनबका
लरज़के तूटे न फिर क्यों वो शामका दरबार
अलीका लहजा था लहजा जनाबे ज़यनबका
यज़ीदियतके लहूको पसीना आ ही गया
सुना जो शाममें खुत्बा जनाबे ज़यनबका
खुदाका शुक्र बयां कर जबीं ज़ुकाके "कलीम"
तुझको नौकर है बनाया जनाबे ज़यनबका
मकां बलंदीसे ऊंचा जनाबे ज़यनबका
लरज़के तूटे न फिर क्यों वो शामका दरबार
अलीका लहजा था लहजा जनाबे ज़यनबका
यज़ीदियतके लहूको पसीना आ ही गया
सुना जो शाममें खुत्बा जनाबे ज़यनबका
खुदाका शुक्र बयां कर जबीं ज़ुकाके "कलीम"
तुझको नौकर है बनाया जनाबे ज़यनबका
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