بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ
किताबे इश्कका
पहला सबक हैदर अली मौला
वो मेरी जिस्त
मेरी जानसे बढ़कर अली मौला
शबे मेअराज जो
परदेके पीछे थे अली मौला
शबे हिजरत
नबीके ज़ीनते बिस्तर अली मौला
ये असदुल्लाह
अयनुल्लाह वजहुल्लाह वलीयुल्लाह
लिखु मैं क्या
खुदाका सारा ही पैकर अली मौला
वो तख्तो ताज
छोड़ आये,
बने वो खादिमे हैदर
जो उनके सामने
आए अली दावर अली मौला
भला किस बातकी
तश्नालबी हो मुझको महेशरमें
नबी मालिके
कौसर,
साकीए कौसर अली मौला
इमामे महदी
आयेगे सजाये जाएगे मिम्बर
के सारे
दहरमें गुंज उठ्ठेगा घर घर अली मौला
कहा हर सूखे
पत्तेने हरा हो जाऊंगा बेशक
तुं बस एक बार
लिख दे मेरे सीने पर अली मौला
फरिश्तोने कुछ
इसके बाद पूछा ही नहीं मुझसे
लहदमें जब
मेरी आकर खडे सरपर अली मौला
"कलीमे करबला" मेरी लहदमें जब मलक आये
सुनाया जब
कसीदा बोले वो उठकर अली मौला
ખાદિમહુસૈન
"કલીમ" મોમિન.
ટિપ્પણીઓ નથી:
ટિપ્પણી પોસ્ટ કરો