بِسْمِ اللّٰهِ
الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ
हम इश्के
अलीकी चौखट पर यूं शम्आ जलाए रखते है
हर दौरमें
करके ज़िक्रे अली बातिलको बुज़ाए रखते है
क्या आफत आएगी
हम पर, ना कोई मुसीबत आती है
हाथोमें सदा
हम गाज़ीके परचमको उठाए रखते है
बस नामे अलीको
लेते है और मिल जाती है हमको गिज़ा
ना जाने शेखजी
किस किस दर पर हाथ उठाए रखते है
हम इश्के
अलीमें दीवाने, रखते है अंदाज़े मीसम
गर कोई ज़बां
भी काटे तो हम मद्ह सुनाए रखते है
हम लोग हुसैनी
है वाइज़ हम लोग उजड़ शकते ही नहीं
हम दिलमें सदा
अपने "खादिम" करबलको बसाए रखते है
ખાદિમહુસૈન
“કલીમ” મોમિન- વલેટવા
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