लिख दे "कलीमे करबला" उन्वान प्यासका
पढ़ कर सुना सभीको तुं कुरआन प्यासका
इक सिम्त थे लईन सभी खूनके प्यासे
इक जां था शेहके साथ गुलिस्तान प्यासका
गाजीके दस्तसे ही हो इफ्तारी बोली प्यास
पूरा न हो शका कभी अरमान प्यासका
बाबाके सीने पर वो तड़पती रही कलीम
क़ुरआने प्यास पर रहा जुज़दान प्यासका
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