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રવિવાર, 19 એપ્રિલ, 2020

अलीका हुँ पिसर

नाम अब्बास है मेरा मैं अलीका हुँ पिसर
मैं मिला दूंगा अभी खाकमें सारा लश्कर

तेग हाथोमें नहीं टूटा हुआ नेजा है
लेने पानी मेरे आकाने मुझे भेजा है
गर विगाकी हो रजा तोड़ दु शामी खैबर

शेर हैदरका हुँ लड़नेका हुनर जानता हुँ
तुममें है कितनी शुजाअ सारी खबर जानता हुँ
मैं इशारा करू सर सारे गिरेंगे कटकर

मैं अकेला हुँ मगर खुदमें ही लश्कर हुँ मैं
जान लो शामीओ अब्बास हुँ हैदर हुँ मैं
मैं उलटदूं अभी खैबरकी तरह ये लश्कर

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