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શનિવાર, 18 એપ્રિલ, 2020

दूसरा

ज़ूमता फितरूस जो शेहके दरसे जन्नतमें गया
पर मिला जब उसको सरवरके करम पर दूसरा

आ रहा है बुतसिकन अब खानके माबूदमें
अय बुतो तुम ढूंढ लेना अब कोई घर दूसरा

कह रहा है ये खुदा गर ढलना चाहुँ जिस्ममें
बस अली तेरे सिवा चाहुँ न पैकर दूसरा

आ गया शब्बीरकी चौखटपे राहिबका सवाल
फिरसे लिखता है खुदा उसका मुकद्दर दूसरा

उसके इस्तिकबालमें अब्बासो अकबर आ गए
ला ज़माने ला जरा हुर सा मुकद्दर दूसरा

है "ज़हीरे जाफरी"का वास्ता हैदर तुजे
इस "कलीम"को तू बना देना कलंदर दूसरा

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