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રવિવાર, 12 એપ્રિલ, 2020

एक हो जाओ मुसलमां



بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ 


खुदारा एक हो जाओ मुसलमां
मुसल मां एक हो जाओ खुदारा

कुरआने पाक का फरमान है ये,
रसूले पाक का अरमान है ये।
हर एक मुस्लिम बिरादर है हमारा।


जो कश्ती है भवर में पार उतरे
जमा हो जाओ सारे बिखरे बिखरे
बुलाता है वो कौसर का कनारा


उठो नफरत के शोलो को बुजादो
खुदा की एक वो रस्सी पकड़ लो।
बस एक मसलक मोहब्बत है हमारा

सितारे बन के कुछ हासिल नहीं है,
वो महफ़िल है मगर महफ़िल नहीं है
सूरज बन कर करो  जग में उजाला।

कोई क्या कर शकेगा एक हो तो,
मुकम्मल है जो ईमां, नेक हो तो।
बनो एक दूसरो का तुम सहारा।

है कुरआनो पयंबर एक फिर भी
है काबा एक किब्ला एक फिर भी
समजते क्यों नहीं हो तुम खुदारा

पयंबर का नवासा सर कटाए
मदद के वास्ते रनमे बुलाए
लगाओ मिल के सब लबैक नारा

 मोहब्बत के चरागो को जलाओ
ये देहशत गर्द को जडसे मिटाओ
अमन रखना यही है दिं हमारा.


‌ "कलीम" मोमिन वलेटवा





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